नई दिल्ली. भारत ने कहा है कि उसने पाकिस्तान की जेल में बंद अपने नागरिक कुलभूषण जाधव के लिए 16 बार काउंसलर एक्सेस मांगा लेकिन पाकिस्तान ने हर बार इसे नकार दिया। इस मामले में भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस इसलिए गया क्योंकि जाधव की जान को खतरा था। फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन गोपाल बागले ने बुधवार को ये भी बताया कि जाधव की मां द्वारा दायर पिटीशन के स्टेटस के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि जाधव को भारत का जासूस बताकर पाकिस्तानी की मिलिट्री कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। मंगलवार देर रात इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इस पर रोक लगा दी थी। फॉरेन मिनिस्ट्री ने क्या कहा..
– बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बागले से मीडिया ने काउंसलर एक्सेस पर सवाल किए। इस पर बागले ने कहा- हमने 16 बार जाधव से मुलाकात के लिए पाकिस्तान से काउंसलर एक्सेस मांगा। लेकिन, हर बार इसे खारिज कर दिया गया।
– बागले के मुताबिक, जाधव की मां ने भी इस बारे में पिटीशन दायर की थी, लेकिन उसके स्टेटस के बारे में फिलहाल, कोई जानकारी नहीं है। स्पोक्सपर्सन ने कहा- इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने हमारी अपील पर उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी भेजी है।
– “27 अप्रैल को फॉरेन मिनिस्टर सुषमा स्वराज ने नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को लेटर लिखा था कि जाधव को फैमिली को वीजा दिया जाए। ”
कोर्ट के फैसले पर नहीं आया पाक का रिएक्शन
– नीदरलैंड्स के हेग में स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की ओर से कुलभूषण की फांसी पर रोक लगाने के बाद पाकिस्तान ने कोई रिएक्शन नहीं दिया है।
– कानून के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट का फैसला माने ऐसा जरूरी नहीं है। हालांकि, फैसला नहीं मानने पर वह इस इंटरनेशनल ज्यूडिशियल फाेरम में अलग-थलग पड़ जाएगा। अगर वह किसी मामले में शिकायत लेकर पहुंचा तो उसकी सुनवाई नहीं होगी।
कुलभूषण की मां को भी दी जानकारी
– फांसी पर लगी रोक के बाद सुषमा स्वराज ने मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात 12:06 बजे ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि मैने कुलभूषण की मां से बात कर उन्हें इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले की जानकारी दी है।
– इसके साथ एक दूसरे ट्वीट में उन्होंने बताया कि कुलभूषण के केस में भारत की ओर से सीनियर लॉयर हरीश साल्वे इंटरनेशनल कोर्ट में दलीलें पेश कर रहे हैं।
– बता दें कि इंटरनेशनल कोर्ट में भारत की तरफ से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने 8 मई को पिटीशन दायर की थी। उन्होंने मांग की कि भारत के पक्ष की मेरिट जांचने से पहले जाधव की फांसी पर रोक लगाएं।
– अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने एक टीवी चैनल से बातचीत में इसे भारत की बहुत बड़ी जीत बताया है। हालांकि, रोहतगी जाधव की सलामती के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।
भारत ने मांगी थीं 4 राहत
1) फांसी की सजा तुरंत संस्पेंड करें।
2) सैन्य अदालत द्वारा सुनाई सजा को अंतरराष्ट्रीय कानून और वियना समझौते का उल्लंघन घोषित करें।
3) सजा पर अमल से पाक को रोकें। पाक कानून के तहत ही रद्द करवाएं।
4) पाक सजा रद्द नहीं करता है, तो अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन घोषित करें।
कोर्ट ने पाक को दिए 3 इंस्ट्रक्शन
1) सरकार तय करे कि जाधव को फांसी न हो।
2) सरकार जो भी कदम उठाए, उसकी जानकारी हमें दे।
3) ऐसा कदम न उठाएं, जो जाधव के अधिकारों का हनन करे।
पाकिस्तान ने जारी किया था जाधव के कबूलनामे का वीडियो
– मार्च, 2016 में पाकिस्तान आर्मी ने जाधव के कथित कबूलनामे का वीडियो जारी किया था। आर्मी ने कहा था- ”कुलभूषण जाधव ने कबूल किया है कि वह रॉ के लिए बलूचिस्तान में काम कर रहा था और टेररिस्ट एक्टिविटीज में शामिल रहा। भारत ने इस वीडियो को खारिज कर सवाल उठाया था। भारत ने शक जताया था कि जाधव को ईरान से किडनैप किया गया है।
– पाकिस्तान ने आरोप लगाया था – “जाधव इंडियन नेवी का सर्विंग अफसर है। उसे सीधे रॉ चीफ हैंडल करते हैं। वो एनएसए के भी टच में है। आपका मंकी (जासूस) हमारे पास है। उसने वो कोड भी बताया है, जिससे वह रॉ से कॉन्टैक्ट करता था। जाधव अब भी इंडियन नेवी का अफसर है। वह 2022 में रिटायर होने वाला है।”
– एक पासपोर्ट (No. L9630722) भी जारी किया गया था। जिसके बारे में कहा गया था कि यह बलूचिस्तान में गिरफ्तार भारतीय शख्स का ही है।
– पासपोर्ट में उसका नाम हुसैन मुबारक पटेल लिखा है। जन्मस्थान महाराष्ट्र का सांगली बताया गया है। पाकिस्तान ने उसके पास ईरान का वैध वीजा होने का भी दावा किया था।
वीडियो में जाधव ने क्या कहा था?
– जाधव के मुताबिक, वे दिसंबर 2001 तक इंडियन नेवी में रहे। पार्लियामेंट अटैक के बाद डोमेस्टिक इंटेलिजेंस जुटाई। 2003 में इंडियन इंटेलिजेंस सर्विस ज्वाइन की।
– अफसर यह भी कहता है कि वह ईरान से बलूचिस्तान में टेररिस्ट एक्टिविटीज को बढ़ावा दे रहा था।
– जाधव के बयान के मुताबिक, वे 2013 में रॉ में आए। ईरान के चाबहार इलाके में 10 साल पहले रॉ का बेस बनाया। कराची और बलूचिस्तान का दौरा किया।
भारत ने खारिज किए थे आरोप
– इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा था, “वीडियो में यह शख्स (जाधव) जो बातें कह रहा है, उनमें कोई सच्चाई नहीं है। उसने जो भी कहा है, प्रेशर में कहा है।”
– हालांकि, भारत सरकार ने ये माना था कि जाधव भारतीय नागरिक ही है और नेवी में अफसर रह चुका है।
– मिनिस्ट्री ने कहा था, ”जाधव कानूनी तौर पर ईरान में बिजनेस करता था। उसे कस्टडी में हैरेस किया गया है। पाकिस्तान में उसकी मौजूदगी सवाल खड़े करती है। इससे ये शक पैदा होता है कि कहीं उसे ईरान से किडनैप तो नहीं किया गया?”
– भारत ने एम्बेसी के अफसरों की जाधव से मुलाकात कराने की इजाजत मांगी थी। पाकिस्तान ने भारत की मांग को ठुकरा दिया था।

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