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1179 Cr के चीनी मिल घोटाले में फंस सकते हैं नसीमुद्दीन, इसीलिए माया ने किया किनारा

लखनऊ.बसपा ने बुधवार सुबह 10 बजे पार्टी के सबसे कद्दावर नेता माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफजल सिद्दीकी को पार्टी से निकाल दिया। इसकी जानकारी देते हुए बसपा के नेशनल जनरल सेक्रेटरी सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि नसीमुद्दीन पर टिकट देने के बदले पैसा लेने, अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। वहीं, सूत्रों की मानें तो ये मामला बसपा शासनकाल में औने-पौने दामों में बेची गई सरकारी चीनी मिलों का है। 2010-11 में CAG ने 1179 करोड़ का मामला पकड़ा था, जिसकी जांच अब योगी सरकार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस जांच की आंच नसीमुद्दीन तक होती हुई मायावती तक पहुंच सकती है। इसी वजह से बसपा ने नसीमुद्दीन और उनके बेटे से किनारा कर लिया है।
क्या है चीनी मिल घोटाला?
– दरअसल, मायावती सरकार में यूपी शुगर कॉरपोरेशन और राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम लिमिटेड की कुल 21 चीनी मिलों को औने-पौने दामों में बेच दिया गया था।
– CAG ने इस मामले की जांच की थी, जिसमें 1179 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई थी। इस खुलासे के बावजूद मामले में अखिलेश सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि 2012 चुनावों में सपा ने अपने मैनिफेस्टो में वादा किया था कि एक आयोग बनाकर मायावती कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच की जाएगी।
– हालांकि, यूपी में योगी सरकार बनने के बाद 8 अप्रैल को एलान किया गया था कि सरकार इस मामले की जांच करवाएगी। अगर जरूरत पड़ी तो सीबीआई से भी जांच करवाई जाएगी।
14 अप्रैल को ही मायावती ने दिए थे संकेत
– बीते 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर मायावती से मीडिया ने पूछा था कि चीनी मिल घोटाले की जांच शुरू हो गई है। इस पर मायावती ने कहा था कि इससे मुझे क्या मतलब है। बसपा शासनकाल में गन्ना विभाग नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास था।
– मायावती के इस बयान के बाद ही ये चर्चा शुरू हो गई थी कि मायावती, नसीमुद्दीन से किनारा कर सकती हैं।
– वहीं, 20 अप्रैल को मायावती ने नसीमुद्दीन को सभी पदों से हटा दिया था, जिसमें बसपा की मेन बॉडी को-ऑर्डिनेटर, भाईचारा कमेटी, यूपी का प्रभार, टिकट वितरण का अधिकार वापस लिए गए थे। इसके साथ ही नसीमुद्दीन को मध्य प्रदेश का इंचार्ज बनाया गया था।
हजारों एकड़ में बंद पड़ी 21 चीनी मीलों को 616 करोड़ में बेचा गया…
– दरअसल, मायावती शासनकाल में बाराबंकी की बंद पड़ी चीनी मिल को भी बेचा गया था। ये मिल 95 एकड़ में फैली थी, जिसे सिर्फ 4 करोड़ में बेच दिया गया।
– इसी तरह अमरोहा की 600 बीघा जमीन वाली चीनी मिल सिर्फ 17 करोड़ में बेच दी गई, जिसे पॉन्टी चड्ढा की कंपनी ने खरीदा था।
– ऐसे ही सहारनपुर में 300 बीघे में फैली चीनी मिल भी सिर्फ 31 करोड़ रुपए में बिकी थी। बुलंदशहर, मोहिद्दीनपुर, रोहाना कलां, सरखैनी, टांडा, सिसवां बाजार, बिजनौर और चांदपुर की चीनी मिलों को भी इसी तरह बेचा गया।
– हजारों एकड़ जमीन वाली इन 21 चीनी मिलों को महज 615 करोड़ रुपए में बेच दिया गया, जबकि इन जमीनों की कीमत कई गुना ज्यादा बताई जाती है।
सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है मामला
– आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की पत्नी और सोशल एक्ट‍िविस्ट नूतन ठाकुर ने भी 2012 में चीनी मिल घोटाले को लेकर पीआईएल दायर की थी।
– इसमें यूपी स्टेट शुगर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 10 और यूपी स्टेट चीनी एवं गन्ना विकास निगम की 11 मिलों को बेचने में नियमों का पालन नहीं किया गया। – इसमें मिल को कम दाम पर बेचा गया। स्टैम्प ड्यूटी का नुकसान हुआ। साथ ही सरकारी खजाने का भी नुकसान हुआ।
क्या कहना है गन्ना मंत्री का?
– गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने बताया, ”सरकार ने चीनी मिल घोटाले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच भी बहुत तेजी से चल रही है। अभी सरकार ने अपने मत से सुप्रीम कोर्ट को भी अवगत कराने का निर्देश अफसरों को दे दिया है।”
– ”चीनी मिल मायावती के कार्यकाल में बेची गई थी, जबकि सपा सरकार में कोई जांच नहीं हुई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनों में सांठ-गांठ थी।”
– ”अब हम जांच करवा रहे हैं। जब घोटाला हुआ तो नसीमुदीन सिद्दीकी गन्ना मंत्री थे। ऐसे में जो व्यक्ति मामले से जुड़ा होगा, सबकी भूमिका की जांच होगी। बंद पड़ी चीनी मिलों को बेचने के साथ-साथ लैंड कास्ट का भी मामला है।”

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