स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपने ग्राहकों से 5000 रुपये मिनिमम बैलेंस नहीं मेंनटेन करने के लिए जुर्माना लगाने की तैयारी में लगा है. लेकिन एचडीएफसी जैसे प्राइवेट बैंक आपसे पहले ही मिनिमम बैलेंस मेंनटेन नहीं करने के लिए 600 रुपये तक जुर्माना वसूल रहे हैं.

एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य पुरी ने दि इकोनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मान लीजिए हमें 10,000 रुपये का एक सेविंग बैंक अकाउंट मिलता है. इस अकाउंट पर हमें 4 फीसदी का ब्याज ग्राहक को देना है. साथ ही 4 फीसदी रकम हमें सीआरआर में रखना ही जिससे हमें कोई कमाई नहीं होती. इस अकाउंट पर हमें एक साल में 200 रुपये की कमाई होती है. अब इस 200 रुपये में आपको क्या-क्या चाहिए? आपको फ्री एटीएम चाहिए, आपको चेकबुक पर किसी तरह का चार्ज भी नहीं चाहिए, आपको कैश हैंडलिंग चार्ज भी नहीं चाहिए.’

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक के प्रमुख ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने मिनिमम बैलेंस के लिए चार्ज लगाने की बात कही है. स्टेट बैंक की प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्या के फैसले का सपोर्ट करते हुए पुरी ने कहा कि आखिर बिना पैसे कमाए आपका बैंक कैसे आपको सुविधा देगी. बैंक पर इस तरह फ्री सुविधा का दबाव बनाने से एनपीए बढ़ता है और बढ़ते एनपीए से देश के बैंक सिर्फ कमजोर होते हैं.

गौरतलब है कि देश के 6 मेट्रो शहरों में एचडीएफसी बैंक ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस कम होने पर 600 रुपये तक चार्ज वसूलती है. इस चार्ज पर टैक्स और सेस ऊपर से लगने से कुल जुर्माना 600 रुपये से अधिक हो जाता है.

एचडीएफसी बैंक के नियमों के मुताबिक उसके शहरी ब्रांचों के खातों पर 10,000 रुपये मिनिमम बैलेंस रखने और छोटे शहरों में 5,000 रुपये मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत है.

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